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Saturday, 22 October 2016

धड़कन



अपने ही दिल की
धड़कन नही
सुन पाता हूँ
मैं!
मेरा दिल तोमेरे दिल मे
धड़कता ही नही हैं।
वो तो
कहीं ओर!

उसकी मधुर ध्वनि
सुनाई ही नही देती हैं।
मेरे कानों को...
आड़े जाता हैं
आवरण मै का!

सुनाई देती हैं सिर्फ
एकरसता की
धक-धक-धक
मधुरता के लिए चाहिए 
समर्पण
सिर्फ समर्पण...

कविता में कहना कितना सरल हैं
समर्पण।
कविता में भावना लिखना
कितना सरल है,
भावनायें समझना?

क्षणिक आवेशित भावनाओं के
समुख धरी रह जाती हैं
कविता से उपजी सारी
समझ!
अमित
मेरी कविताए स्वरचित मौलिक है।




Sunday, 2 October 2016

रावण


रावण
रा यानी कि रोशनी।
अपने अन्दर की रोशनी का
हरण होना या 
लुप्त हो जाना ही
रावण है।

दशाननदस मुँख
यानी के अनेक चेहरे
अनेक व्यक्तित्व
विभिन्न परिस्थितियों के
विभिन्न चेहरेविभिन्न आवरण
अनेक आवरणों के भीतर
दब गया मेरा विशुद्ध अपना
व्यक्तित्व...
दर्पण भी नही पहचान पाता है
मेरी अपनी
निर्मल अबोध स्वच्छ छवि

आओइन नकली चेहरों के
दहन से प्रज्वलितन अग्नि
की रोशनी को ग्रहण कर,
आत्मशक्ति की एकाग्र लौ,
से दसों विकारो,
कामकोध्रलोभमोह,
ईष्याद्वेषअहंकार,
छलहठआलस्य
को नष्ट कर

अपने अन्दर की सीतारूपी
आत्मा को अग्नि से पवित्र कर
राम के अंश के समतुल्य 
बनने की कोशिश मे मैं!
और मेरे साथ सारा जन समूह!
और मेरे साथ सारा जन समूह!
                                                                                            अमित


                       मेरी कविताए स्वरचित व मौलिक है।


                                                                                             


प्यास !



मैं एक छोटे पौधे के
लिए...
बैठा हूँ
उसकी गुड़ाई के लिए
निराई के लिए
फूल खिलने के लिए
जरूरत है !
एक मुट्टी भर धूप की
जो घेर रखी है तुम्हारी
परछाई ने

उसे जरूरत है
दो बूँद पानी की
जो सोख लेती है
तुम्हारी प्यास !


अगर मैं उठ गया
और मेरा सिर
आप की नाक!
से टकरा गया
तो फिर मेरा दोष न होगा।

अमित
              मेरी कविताए स्वरचित  मौलिक है।



प्रवासी मजदूर!

प्रवासी कौन है ? प्रवासी का शाब्दिक अर्थ है जो अपना क्षेत्र छोड़ काम धंधे के लिये, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में  में निवास करता है अर्थात...