|
रावण
रा यानी कि रोशनी।
अपने अन्दर की रोशनी का
हरण होना या
लुप्त हो जाना ही
रावण है।
दशानन, दस
मुँख
यानी के अनेक चेहरे
अनेक व्यक्तित्व
विभिन्न परिस्थितियों के
विभिन्न चेहरे, विभिन्न आवरण
अनेक आवरणों के भीतर
दब गया मेरा विशुद्ध अपना
व्यक्तित्व...
दर्पण भी नही पहचान पाता है
मेरी अपनी
निर्मल अबोध स्वच्छ छवि
आओ, इन नकली चेहरों के
दहन से प्रज्वलितन अग्नि
की रोशनी को ग्रहण कर,
आत्मशक्ति की एकाग्र लौ,
से दसों विकारो,
काम, कोध्र, लोभ, मोह,
ईष्या, द्वेष, अहंकार,
छल, हठ, आलस्य
को नष्ट कर
अपने अन्दर की सीतारूपी
आत्मा को अग्नि से पवित्र कर
राम के अंश के समतुल्य
बनने की कोशिश मे मैं!
और मेरे साथ सारा जन समूह!
और मेरे साथ सारा जन समूह!
अमित
मेरी कविताए स्वरचित व मौलिक है।
|
Sunday, 2 October 2016
रावण
प्रवासी मजदूर!
प्रवासी कौन है ? प्रवासी का शाब्दिक अर्थ है जो अपना क्षेत्र छोड़ काम धंधे के लिये, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में में निवास करता है अर्थात...
-
उसका मेरा मिलना उसे उसकी , मुझे तेरी याद दिलाता है उसके मेरे बीच साझी है , वह रज़ , जहां ह...
-
उद्यान , पेड़ - पौधे , लताएँ-बेले , अनेक – जातियाँ , प्रजातियाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ ,.... अनेक भाषाएँ व बोलियाँ रीति...
-
अविरल ऊर्जा है- खादी खादी हाथ से कता सूत या एक परिधान मात्र ही नही! अपितु एक विचार-धारा है। एक सिद्धांत है।खादी ...
No comments:
Post a Comment