पहाड़ी !
तुम्हारा चेहरा
देखा
मुस्कराता हुआ
चेहरा देखा
ओस को बूंदों से
भीगी कली में
तुम्हारा नहाया
हुआ
चेहरा देखा
मिट्टी की
सोंधी-सोंधी
खुशबु से सरोबार
तुम्हारा चेहरा
देखा
बादल ने...
स्पर्श चाहा
तुम्हारा
निरूउत्तर
लाजवंती मे
तुम्हारा चेहरा
देखा
अमित
मेरी कविता स्वरचित व मौलिक है।
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