Monday, 8 August 2016
Sunday, 7 August 2016
शहीद की आत्मा
आत्मा
एक शहीद की
देखने
वास्ते तस्वीर
अपने
देश की !
विचरती
हुयी आयी
जनपथ
बिजनौर की
नगर
पालिका
हल्दौर
में !
विस्मित
हुई देख
खण्डर
को !
अनुमान
लगाया सहज !
हड़प्पा
के अवशेष !
आकर
देखा नजदीक !
आशियाने
में खण्डर के !
बनी
हुई है चरागाह !
आश्रय
में उसके खेलकर ताश
कर
रहे लोग मनोरजंन !
और
नजदीक आ के देखा
एक
शिला पर उभरे है
कुछ अक्षर, ज्ञात हुआ यह है
"शहीद स्मारक "
जो
पहुँचने की तैयारी कर रहा है
अगली
सदी में !
तथापि
हिम्मत न हारते हुए
पाषाण
को नवीन में
बदलने
के लिए
जगह-जगह
दिये आवेदन-पत्र !
सिसक
रही है अब इंतजार में !
मुझे
डर है कही फिर से
शहीद न हो जाए
एक
शहीद की आत्मा !
अमित
मेरी कविता स्वरचित व मौलिक है।
Wednesday, 3 August 2016
विश्वास
श्वेत दिन और श्याम रात
के अतिरिक्त
मेरे पास अन्य कोई रंग नही है!
मगर सबको विश्वास है
अटूट विश्वास है!
धरती से अम्बर तक
रंगों को उत्सर्जित करने की
अपार असीम ऊर्जा
अपने अन्दर समटे हुए हूँ
मैं!
प्रेरित करते है मुझें,
मेरे अपने स्वजन
मेरे अपने स्वजन
रंगों से सरोबार तूलिका को
पकड़ने के लिए,
लेकिन, अँगुली से स्पर्श कर
लेकिन, अँगुली से स्पर्श कर
बल्व जलाने की कोशिश करता हूँ
मैं!
परंतु क्या यह संभव है
शायद नहीं !
लेकिन कभी सोचता हूँ
यह हो भी सकता है
अगर अपनी समस्त ऊर्जा को
एकाग्र कर एक बिन्दु पर केन्द्रित करे,
तो सब संभव हो सकता है ।
और शायद यही उनका विश्वास है
परंतु क्या यह संभव है
शायद नहीं !
लेकिन कभी सोचता हूँ
यह हो भी सकता है
अगर अपनी समस्त ऊर्जा को
एकाग्र कर एक बिन्दु पर केन्द्रित करे,
तो सब संभव हो सकता है ।
और शायद यही उनका विश्वास है
अटूट विश्वास है।
अमित
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मेरी
कविता स्वरचित व मौलिक है।
Thursday, 28 July 2016
अलविदा क्रोध( Goodbye Krodh)
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क्रोध विखंडन प्रक्रिया से
उत्सर्जित ऊर्जा है
भिन्नताओं के घर्षण से
उत्पन नकारात्मक ऊर्जा है
विचारों के टकराव से
उत्पन्न नकारात्मक विघुत है
अनुकूलता-प्रतिकुलता से
उत्पन्न आवेग है
मनोस्थिति का क्षणिक
असंतुलन है क्रोध!
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क्रोध के अनेक
कारक, कारण, विकारण हैं
परन्तु सृजन स्वम् करता हूँ
सृष्टि के समस्त अवयवों की
पहचान अलग-अलग हैं
भिन्न-भिन्न हैं
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सृष्टि की यही भिन्नता
सुन्दर! अदभूत! अप्रितम है
सब का किरदार
अलग-अलग हैं
रंगमंच का आन्नद लेना हैं
लुफ्त उठाना हैं तो ...
भिन्नता को स्वीकार करना ही है
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बस प्रयास की आवश्यकता है
पल भर क्रोध को देखना है बस!
दृष्टा की भॉति !
इस प्रयास की पुर्नावृति
से भिन्नताओं को स्वीकारने का
संस्कार उत्पन होगा।
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भिन्नताओं की संलयन
प्रक्रिया से उत्सर्जित
ऊर्जा के प्रकाश मे
अलविदा हो जायेगा क्रोध।
अलविदा क्रोध, अलविदा
क्रोध।
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अमित
मेरी कविताए स्वरचित व मौलिक है।
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Tuesday, 26 July 2016
कोण (Angle)
जो मैं सोचता हूँ
क्या वो ठीक है।
सच है !
जो हम करते हैं
क्या वो ठीक है
पूर्ण है ?
जीवन के भिन्न-भिन्न
कोण !
हर कोण का एक अलग
दृष्टिकोण !
पल-पल मे बदलते हैं।
दिन के रंग
दिन के हर अंश के साथ
बदलता है हिमालय का रंग !
लाल,पीला,नीला,सतरंगी,बर्फीला
न जाने कौन सा रंग...
सच है !
हर कोण का अलग अंश...
अलग दृष्टिकोण !
न जाने कौन सा दृष्टिकोण...
सच है !
अमित
Sunday, 24 July 2016
कौन कहता है? मैं अकेला रहता हूँ !
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कौन कहता है !
मैं अकेला रहता हूँ
पहाड़ो पर...
अप्रतिम सौन्दर्य
की छाँव तले रहता हूँ
बर्फीली हवाओ व देवदार के
संग रहता हूँ
ओलावृष्टि मे मोतियों की
सेज पर चलता हूँ
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प्रवासी मजदूर!
प्रवासी कौन है ? प्रवासी का शाब्दिक अर्थ है जो अपना क्षेत्र छोड़ काम धंधे के लिये, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में में निवास करता है अर्थात...
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उद्यान , पेड़ - पौधे , लताएँ-बेले , अनेक – जातियाँ , प्रजातियाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ ,.... अनेक भाषाएँ व बोलियाँ रीति...
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उसका मेरा मिलना उसे उसकी , मुझे तेरी याद दिलाता है उसके मेरे बीच साझी है , वह रज़ , जहां ह...
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समस्या का हल नहीं हैं हड़ताल हड़ताल का अर्थ नहीं है असहयोग आन्दोलन आन्दोलन का अर्थ हैं संघर्ष संघर्ष का अर्थ ...
