|
क्रोध विखंडन प्रक्रिया से
उत्सर्जित ऊर्जा है
भिन्नताओं के घर्षण से
उत्पन नकारात्मक ऊर्जा है
विचारों के टकराव से
उत्पन्न नकारात्मक विघुत है
अनुकूलता-प्रतिकुलता से
उत्पन्न आवेग है
मनोस्थिति का क्षणिक
असंतुलन है क्रोध!
|
|
क्रोध के अनेक
कारक, कारण, विकारण हैं
परन्तु सृजन स्वम् करता हूँ
सृष्टि के समस्त अवयवों की
पहचान अलग-अलग हैं
भिन्न-भिन्न हैं
|
|
सृष्टि की यही भिन्नता
सुन्दर! अदभूत! अप्रितम है
सब का किरदार
अलग-अलग हैं
रंगमंच का आन्नद लेना हैं
लुफ्त उठाना हैं तो ...
भिन्नता को स्वीकार करना ही है
|
|
बस प्रयास की आवश्यकता है
पल भर क्रोध को देखना है बस!
दृष्टा की भॉति !
इस प्रयास की पुर्नावृति
से भिन्नताओं को स्वीकारने का
संस्कार उत्पन होगा।
|
|
भिन्नताओं की संलयन
प्रक्रिया से उत्सर्जित
ऊर्जा के प्रकाश मे
अलविदा हो जायेगा क्रोध।
अलविदा क्रोध, अलविदा
क्रोध।
|
|
अमित
मेरी कविताए स्वरचित व मौलिक है।
|
Thursday, 28 July 2016
अलविदा क्रोध( Goodbye Krodh)
प्रवासी मजदूर!
प्रवासी कौन है ? प्रवासी का शाब्दिक अर्थ है जो अपना क्षेत्र छोड़ काम धंधे के लिये, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में में निवास करता है अर्थात...
-
उसका मेरा मिलना उसे उसकी , मुझे तेरी याद दिलाता है उसके मेरे बीच साझी है , वह रज़ , जहां ह...
-
उद्यान , पेड़ - पौधे , लताएँ-बेले , अनेक – जातियाँ , प्रजातियाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ ,.... अनेक भाषाएँ व बोलियाँ रीति...
-
अविरल ऊर्जा है- खादी खादी हाथ से कता सूत या एक परिधान मात्र ही नही! अपितु एक विचार-धारा है। एक सिद्धांत है।खादी ...
No comments:
Post a Comment