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Thursday, 28 July 2016

अलविदा क्रोध( Goodbye Krodh)





क्रोध विखंडन प्रक्रिया से
उत्सर्जित ऊर्जा है
भिन्नताओं के घर्षण से
उत्पन नकारात्मक ऊर्जा है
विचारों के टकराव से
उत्पन्न नकारात्मक विघुत है
अनुकूलता-प्रतिकुलता से
उत्पन्न आवेग है
मनोस्थिति का क्षणिक
असंतुलन है क्रोध!



क्रोध के अनेक
कारककारणविकारण हैं
परन्तु सृजन स्वम् करता हूँ
सृष्टि के समस्त अवयवों की
पहचान अलग-अलग हैं    
भिन्न-भिन्न हैं

सृष्टि की यही भिन्नता
सुन्दरअदभूतअप्रितम है
सब का किरदार 
अलग-अलग हैं
रंगमंच का आन्नद लेना हैं
लुफ्त उठाना हैं तो ...
भिन्नता को स्वीकार करना ही है


बस प्रयास की आवश्यकता है
पल भर क्रोध को देखना है बस!
दृष्टा की भॉति !
इस प्रयास की पुर्नावृति
से भिन्नताओं को स्वीकारने का
संस्कार उत्पन होगा।



भिन्नताओं की संलयन
प्रक्रिया से उत्सर्जित
ऊर्जा के प्रकाश मे
अलविदा हो जायेगा क्रोध।
अलविदा क्रोधअलविदा क्रोध।
                                                        अमित
                                             मेरी कविताए स्वरचित व मौलिक है।


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