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Sunday, 7 August 2016

शहीद की आत्मा

स्वर्ग से चली
आत्मा एक शहीद की
देखने वास्ते तस्वीर 
अपने देश की !

विचरती हुयी आयी
जनपथ बिजनौर की
नगर पालिका
हल्दौर में !

विस्मित हुई देख
खण्डर को !
अनुमान लगाया सहज !
हड़प्पा के अवशेष !

आकर देखा नजदीक !
आशियाने में खण्डर के  !
बनी हुई है चरागाह !
आश्रय में उसके खेलकर ताश
कर रहे लोग मनोरजंन !
और नजदीक आ के देखा
एक शिला पर उभरे है
 कुछ अक्षरज्ञात हुआ यह है
"शहीद स्मारक "

जो पहुँचने की तैयारी कर रहा है 
अगली सदी में !
तथापि हिम्मत न हारते हुए
पाषाण को नवीन में
बदलने के लिए
जगह-जगह दिये आवेदन-पत्र !
सिसक रही है अब इंतजार में !

मुझे डर है कही फिर से
शहीद न हो जाए
एक शहीद की आत्मा !


अमित
मेरी कविता स्वरचित व मौलिक है।

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