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Wednesday, 20 July 2016

कौन हूँ मैं ? (Who am I)




एक सपना देखा
विचित्र !
अनेक चेहरे उग आये
मेरे स्थूल शरीर पर
अनेक चेहरे अनेक व्यक्तित्व
असमंजस में...
आखिर कौन हूँ मैं ?

एक नाम एक पद,
पितापुत्रपति
ऐसे न जाने कितने दायित्व !
और रिश्ते !
राजाप्रजासैनिक,
किसाननेतादबंग,
धनवाननिर्धनसूदखोर !
धर्म सम्प्रदाय,
जातिउपजाति, गोत्र !
देवदानवमानव
सॉसे गिनता एक जीव मात्र  !
साधारण मनुष्य !
  आखिर कौन हूँ मैं ?

  या फिर मात्र एक शरीर !
  शरीर भी विसर्जित हो,
  पचं-तत्व में विलीन हो  जाता है।
 लेकिन फिर भी शेष रह जाता है
मेरा स्वम् का अस्तित्व।

मैं हूँ एक ज्योतिमय
बिन्दू !
एक शुन्य !
जिसका ओर ना छोर
न आदि न अन्त
दृष्टा हूँ मैं
चैतन्य अविनाशी अक्षय
ऊर्जा हूँ मैं ।
आन्नदखुशीसुखशान्ति
सब मेरे अन्दर निहित हैं

बस अपने ऊपर ओढ़े अनेक
आवरणों को हटा...
वातायन के पट खोलने की देरी है बस...
सब खुशीयों का खजाना है हमारा है 
मै एक आत्मा हूँ
खुदा का नूर हूँ
जीज़स की लाइट हूँ
गुरू का प्रकाश हूँ
अनुमान नही,एक अनुभव है
अनुभूति हैमै एक आत्मा हूँ
अज़र अमर अविनाशी आत्मा हूँ ।

अमित
मेरी कविता स्वरचित व मौलिक है।

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